हिंदी हैं हम 2018-04-21T06:46:42+00:00

बिहार संवादी लाइव

हिंदी हैं हम

हमारी भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान को परिभाषित करती है. तेजी से बदलते इस दौर में महत्वपूर्ण यह नहीं है की हमारे शिक्षा का माध्यम क्या है या क्या रहेगा, बल्कि महत्वपूर्ण यह है की हमारे सपनों और सोच का माध्यम क्या है. महत्ता उस भाषा की है, जो हमें स्वयं से जोड़ती है और अपने आस-पास की दुनिया को परिभाषित करने में हमें सशक्त करती है. पिछले कुछ सालों में देशवासियों में भारतीय भाषाओँ के प्रति जिस गौरव और सम्मान का पुन:संचार हुआ है यह हम सब की लिए खुशी की बात है.

दैनिक जागरण का मानना है की भाषा का संरक्षण सिर्फ शब्दकोष या व्याकरण बनाने से नहीं हो सकता. भाषा तभी जीवंत होती है जब उसे लिखने और पढने वाले हों. भाषा तभी दीर्घायु हो सकती है, जब नई  पीढ़ी के लेखक और पाठक खुद को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा में नित नए आयाम जोड़ें. यही कारण है की लिखने और पढ़ने की समृध परंपरा का निर्वहन भाषा प्रेमियों का प्रथम दायित्व है.

इस देश में पचास करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं और हिंदी का प्रसार अन्य सात प्रमुख भारतीय भाषाओँ से भी ज्यादा है और यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ भी रही है. जब हवा का रूख अपने अनुकूल हो तब हम सब का दायित्व बनता है की जिस भाषा ने हमें बौधिक रूप से, राजनितिक रूप से और कलात्मक रूप से इतना समृध किया है उस भाषा के उत्थान और प्रसार के लिए हम भी ठोस कदम उठाएं. दैनिक जागरण अपने साढ़े पांच करोड़ पाठक परिवार के सहयोग से हर तरह की रचनाओं के लिए पाठक वर्ग तैयार कर सकता है. पिछले कुछ सालों में नई सोच, नयी शैली और नई कहानियों की अद्भुत कृतियां  प्रकाशित हुई हैं. यह पाठकों का भी अधिकार है की वह नई पीढ़ी के उन लेखकों को जानें और पढ़ें जो हिंदी भाषा में नया काम करने आये हैं.

दैनिक जागरण का अभियान ‘हिंदी हैं हम’ का अपेक्षित परिणाम हिंदी की गौरवशाली विरासत को संजोना, वर्तमान पीढ़ी के लिए ठोस आधार तैयार करना और आने वाले पीढ़ी को इस समृध भाषा से जोड़ना है. ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के अंतर्गत दैनिक जागरण ने हिंदी बेस्टसेलर, जागरण संवादी, जागरण वार्तालाप, जागरण ज्ञानवृति जैसे मंच और उपक्रम स्थापित किये हैं. दैनिक जागरण का गर्व हिंदी भाषा के समृधि में निहित है क्योंकि “हिंदी हैं हम”.

हिन्दी हैं हम - भाषा से जुड़िए भाषा में पढ़िए

‘भाषा से जुड़िए भाषा से पढ़िए‘ अभियान के अंतर्गत 'मेरा शहर मेरी कहानी' योजना प्रवृष्टियाँ आमंत्रित कर रही है, जिसमें आप अपने शहर की पृष्ठभूमि से जुड़ी कोई भी कहानी हमें भेज सकते है। शामिल हुई समस्त प्रवृष्टियों में से विख्यात लेखकों व कहानीकारों द्वारा 30 सर्वश्रेष्ठ कहानियों का चयन किया जाएगा। तथा आयोजकों की ओर चयनित कहानियों के संग्रह का पुस्तक के रूप में प्रकाशन किया जाएगा।
हिन्दी हैं हम - भाषा से जुड़िए भाषा में पढ़िए
हिन्दी हैं हम - भाषा से जुड़िए भाषा में पढ़िए
और जानिए
और जानिए
और जानिए