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धर्म को लेकर लोगों में भ्रांत धारणाएं बनी हुई हैं, उपासना पद्धति धर्म नहीं होती: सरसंघचालक डा मोहन भागवत

नई दिल्ली: "भाषा लोगों के दिलों के साथ-साथ समाज को जोड़ने का प्रमुख साधन है. साहित्य की रचना केवल स्वांत सुखाय ना होकर बहुजन हिताय होनी चाहिए. भाषा का सम्मान समुचित [...]

2024-01-29T14:26:35+05:30Tags: , , , |

भारतीयता हमारी पहचान, राष्ट्रवाद परम धर्म और शिक्षा सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप हो: उपराष्ट्रपति धनखड़

हरिद्वार: "कुछ गिने-चुने लोग अपनी संस्कृति, गौरवमयी अतीत और वर्तमान विकास को लेकर अपमान का भाव रखते हैं और भारत की महान छवि को धूमिल करने में लगे रहते हैं. इनके हर [...]

2024-01-29T14:36:56+05:30Tags: , , , |

कई बार धर्म से ज़्यादा हमारे आचार-विचार, परिवेश, भाषा तथा संस्कृति महत्त्वपूर्ण होती: महुआ माजी

नई दिल्ली: साहित्य अकादेमी के नौ दिवसीय 'पुस्तकायन' पुस्तक मेले के अंतिम दिन, 'अपने प्रिय लेखक से मिलिए' कार्यक्रम में उर्दू लेखक ख़ालिद जावेद, हिंदी लेखिका महुआ माजी और पंजाबी लेखक बलदेव सिंह 'सड़कनामा' पाठकों से [...]

2024-01-29T14:38:57+05:30Tags: , , |

बाजारों में बिकता जोश नहीं, एक अहसास है लखनऊ… संवादी के सत्र ‘सबरंग लखनऊ’ में वक्ताओं का मत

लखनऊ: संवादी के 'लखनऊ सबरंग' सत्र में न सिर्फ इस शहर के इतिहास को टटोला गया, बल्कि उन पहलुओं की भी पड़ताल हुई, जो लखनऊ को लखनऊ बनाते हैं. हमराही बने श्रोता पुराने समय [...]

2024-01-29T14:43:30+05:30Tags: , , , |
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