नई दिल्ली: “अतीत में भारतीय फिल्म उद्योग में महिला कलाकारों द्वारा निभाए गए सभी असाधारण किरदार और उनकी और अधिक करने की इच्छा ने हमें उस स्तर पर पहुंचने के लिए प्रेरित किया जहां अब हम फिल्मों में महिलाओं पर केंद्रित कहानियां सुना रहे हैं.” अभिनेत्री विद्या बालन ने यह बात ‘वुमेन एंड ग्लास सीलिंग’ यानी ‘महिलाएं और बाधाएं’ विषय पर आयोजित एक संवाद सत्र में कही. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता इस अभिनेत्री ने अलग-अलग किरदार निभाने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार नई कहानियों और पात्रों की तलाश करना बहुत महत्वपूर्ण है, जो दर्शकों से जुड़ सकें. उन्होंने कहा कि अपरंपरागत भूमिकाएं और उन किरदारों को निभाते समय खुद में बने रहना मेरे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होता है. हर फिल्म में बहुमुखी किरदार निभाने की प्रेरणा से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए बालन ने कहा कि अकल्पनीय भूमिकाएं करने की इच्छा और भारतीय सिनेमा में महिला किरदारों के प्रति रूढ़िवादिता को तोड़ने की इच्छा उनके लिए प्रेरणा रही है.

 

बालन ने यह भी कहा कि मैं अपनी प्रत्येक फिल्म में सहज स्थिति से बाहर निकलने का विचार पसंद करती हूं और इसके लिए बहुत कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है जिससे मुझे खासी स्वतंत्रता मिलती है. भारतीय सिनेमा में महिलाओं के चित्रण के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए विद्या बालन ने कहा कि हम सभी को महिलाओं के संबंध में हमारे समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता को दूर करने की जरूरत है. अभिनेत्री ने कहा कि आज की दुनिया में महिलाएं समय से बहुत आगे हैं. याद रहे कि बालन ने तीन दशकों के अपने अभिनेत्री करियर में ‘परिणीता’, ‘भूल भुलैया’, ‘पा’, ‘कहानी’, ‘द डर्टी पिक्चर’, ‘शकुंतला देवी’, ‘शेरनी’ और ‘जलसा’ जैसी फिल्मों में बड़ी खूबसूरती के साथ अपरंपरागत भूमिकाएं निभाई हैं. उनकी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा में महिला पात्रों के चित्रण को बदल कर रख दिया है.