नई दिल्ली: आयुष मंत्रालय ने अपने तहत आने वाले संस्थानों के युवा विद्यार्थियों के लिए ‘वैज्ञानिक के रूप में एक दिन’ पहल को शुरू किया है. इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान का गहन अनुभव प्रदान किया गया. युवाओं को प्रयोगशाला के काम, उन्नत उपकरणों और आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के साथ पारंपरिक चिकित्सा के एकीकरण का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया गया. याद रहे कि प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हुए, विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासा बढ़ाने और वैज्ञानिक स्वभाव को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान प्रयोगशालाओं, तारामंडल, अंतरिक्ष केंद्रों और विज्ञान संस्थानों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया था. इस दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, आयुष संस्थानों ने अपनी अनुसंधान सुविधाओं में विद्यार्थियों का स्वागत किया, जिससे उन्हें वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करने, अत्याधुनिक तकनीक का पता लगाने और मुख्यधारा की स्वास्थ्य देखभाल में आयुष प्रणालियों की विशाल क्षमता को समझने का मौका मिला. इस पहल के हिस्से के रूप में एमिटी विश्वविद्यालय जयपुर के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, मानित विश्वविद्यालय, जयपुर का दौरा किया. वहां प्रो सीआर यादव, डा महेंद्र प्रसाद, डा सारिका यादव, डा भानु प्रताप सिंह और डा रश्मी प्रकाश गुराओ के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने श्वसन प्रणाली पर विशेष ध्यान देने के साथ क्रिया शरीर विभाग के उन्नत उपकरण और मशीनरी का पता लगाया. उन्हें बाडी प्लेथीस्मोग्राफ, सीपीईटी और 3डी वीआर लैब जैसे अत्याधुनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली देखने का अवसर मिला. विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य देखभाल अनुसंधान को आगे बढ़ाने में इसकी क्षमता को पहचानते हुए नवीन प्रौद्योगिकी में गहरी रुचि व्यक्त की.

इसी तरह डा गुरुराजू सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज गुडीवाड़ा के विद्यार्थियों ने केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद ‘सीसीआरएच’ के तहत क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान गुडीवाड़ा की अनुसंधान प्रयोगशाला का दौरा किया. प्रयोगशाला कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को होम्योपैथी में उपयोग किए जाने वाले प्रयोगशाला उपकरणों और अनुसंधान विधियों का विस्तृत प्रदर्शन प्रदान किया. सत्र की अध्यक्षता डा किशन बनोथने की, जिन्होंने पारंपरिक चिकित्सा में वैज्ञानिक जांच के महत्त्व पर जोर दिया. कैप्टन जयलाल एकेडमिक स्कूल, लोहाट, गुरुग्राम, बादली, झज्जर, हरियाणा के विद्यार्थियों ने आयुष अनुसंधान में व्यावहारिक और गहन अनुभव के लिए केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान झज्जर का दौरा किया. इस यात्रा ने युवाओं को योग और प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक सिद्धांतों का पता लगाने, शोधकर्ताओं के साथ बातचीत करने और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का अध्ययन कैसे किया जा रहा है, यह प्रत्यक्ष रूप से देखने का अनूठा अवसर रहा. राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025 की थीम ‘विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना’ थी. यह पहल उस थीम की भावना से पूरी तरह मेल खाती है. इन यात्राओं ने न केवल विद्यार्थियों में शोध के प्रति जुनून जगाया बल्कि विज्ञान और नवाचार में भविष्य के नेताओं को विकसित करने के भारत के दृष्टिकोण को भी मजबूत किया. विद्यार्थी आयुष क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के समर्पण से प्रेरित हुए और उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान में करियर तलाशने की इच्छा व्यक्त की. संकाय सदस्यों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की.