नई दिल्लीः रवीन्द्रनाथ त्यागी स्मृति सम्मान की घोषणा हो चुकी है. साल  2019 के लिए कथाकार सूर्यबाला को शीर्ष सम्मान एवं मलय जैन को सोपान सम्मान दिया जाएगा. निर्णायक-समिति की बैठक साहित्यकार चित्रा मुद्गल की अध्यक्षता में हुई, जिसमें डा कमलकिशोर गोयनका, डा प्रताप सहगल, डा हरीश नवल, डा प्रेम जनमेजय तथा शारदा एवं इंदु त्यागी ने फोन पर चर्चा के बाद सर्व सम्मति से यह फैसला लिया. रवीन्द्रनाथ त्यागी शीर्ष सम्मान में इक्कीस हजार रुपए की नकद राशि, श्रीफल, शाल एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किया जाएगा. रवीन्द्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान में इक्वायवन सौ रुपए की नकद राशि, सात हजार मूल्य की 'रवीन्द्रनाथ त्यागी रचनावली' श्रीफल, शाल एवं स्मृति चिह्न प्रदान किया जाएगा.

 

सूर्यबाला हमारे समय की एक महत्वपूर्ण रचनाकार हैं. जीवन को देखने का उनका दृष्टिकोण एक सजग एवं सकारात्मक सोच के रचनाकार का है. चाहे वे एक कथाकार के रूप में अपने अंर्तमन को अभिव्यक्ति देती हैं अथवा विसंगतियों के विरुद्ध अपना आक्रोश अभिव्यक्त करती हैं, उनका संवेदनशील  मन वंचित का पक्षधर  दृष्टिगत होता है. उनके अंदर एक सहज करुणा विद्यमान है जो रचना के माध्यम  बेहतर मानवीय समाज के लिए अभिव्यक्त होती है. कथा शिल्प में सिद्धहस्त होने के कारण उनकी व्यंग्य रचनाओं में एक ऐसा प्रवाह है जो आदि से अंत तक पाठक को बांधने  की क्षमता रखता है.  1972  में पहली कहानी सारिका में प्रकाशित हुई एवं 1975 में प्रकाशित पहला उपन्यास मेरे संधिपत्र विशेष रूप से चर्चित हुआ.'अजगर करे न चाकरी', 'धृतराष्ट्र टाइम्स', 'देशसेवा के अखाड़े में', 'भगवान ने कहा था', 'झगड़ा निपटारक दफ़तर', जैसे प्रख्यात व्यंग्य संकलनो की रचयिता सूर्यबाला का सद्यः प्रकाशित उपन्यास कौन देस को वासी , वेणु की डायरी 'विशेष चर्चा में है.

इसी तरह मलय जैन के पास व्यंग्य की सार्थक एवं प्रखर संप्रेषणीय भाषा है. वे व्यंग्य के  मुहावरे से परिचित  हैं और  उसकी भाषा को तराशने के लिए निरंतर श्रमशील हैं. मलय जैन का पहला व्यंग्य उपन्यास 'ढाक के तीन पात' चर्चा के केंद्र में रहा है. उक्त व्यंग्य उपन्यास के 3 संस्करण प्रकाशित हो चुकें हैं तथा इसका तमिल भाषा में भी अनुवाद हुआ है. उनका व्यंग्य उपन्यास प्रशासन में सुशोभित उन विसंगतिपूर्ण चरित्रों को उद्घाटित करता है, जिनकी कृपा से योजानाएं ढाक के तीन पात -सी कदमताल कर रही हैं. व्यंग्य नाटक 'समझ गया साहब' का लेखन एवं हाल ही में भोपाल जनजातीय संग्रहालय में मंचन हुआ है. उनके दो किशोर उपन्यास 'दीवान गढ़ी का रहस्य' तथा 'यक्षहरण' प्रकाशित हुए हैं. उन्होंने पोलिश लेखक वलेरियन डोमिंसकी की अंग्रेज़ी कहानियों एवं व्यंग्य रचनाओं का हिन्दी अनुवाद भी किया है. 'व्यंग्य यात्रा' के तत्वावधान सम्मान समारोह 9 मई को'हिंदी भवन' में होगा.