नई दिल्लीः बहुचर्चित ग़ज़लकार रवि ऋषि उर्फ़ रविंद्र शर्मा के ग़ज़ल संग्रह 'शहर में वनवास' का लोकार्पण राजधानी के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में संपन्न हुआ. यह कार्यक्रम कवि लोक, अयन प्रकाशन और परिचय साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ था. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ केके ऋषि ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सीमाब सुल्तानपुरी, विशिष्ट अतिथि के रूप में सर्वेश चंदौसवी को आमंत्रित किया गया था. वरिष्ठ ग़ज़लकार और गीतकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, दीक्षित दनकौरी, राजेश राज, उर्मिल सत्यभूषण और भूपाल सूद समेत कई साहित्यप्रेमी वहां उपस्थित थे. संचालन अनिल 'मीत' ने किया.
अलका सिन्हा की इस संकलन के बारे में टिप्पणी थी, रवि ऋषि को पढ़ते हुए छायावादी कवियों का प्रकृति प्रेम मूर्त होने लगता है. इस शायर में जो सबसे ख़ास बात है, वह है प्रकृति की ख़ूबसूरती बचाए रखने की प्रतिबद्धता और पर्यावरण संरक्षण की चिंता जो इन्हें विशिष्टता प्रदान करती है. इनके शेरों में प्राकृतिक बिम्बों का मानवीकरण देखते ही बनता है:


'मुश्किल से अपना जिस्म ढका है ज़मीन ने
हैं पेड़ कुछ बचे हुए, थोड़ी सी घास है.'

रवि ऋषि के इस ग़ज़ल संग्रह 'शहर में वनवास' को अयन प्रकाशन ने छापा है.