महू: आम जनों में भारतीय संविधान के प्रति जागरूकता पैदा करने, मूल अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने हेतु पीतल के पन्नों पर संविधान का निर्माण किया गया है. कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत की प्रेरणा से संविधान से देश पुस्तक 2000 पीतल के पन्नों पर उकेरी गई है. इस पुस्तक का विमोचन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जन्मस्थली महू में किया गया. इस किताब को बनाने का संकल्प पिछले वर्ष बाबा साहेब डा भीमराव अंबेडकर की जयंती पर किया गया. किताब का मुख्य पृष्ठ संविधान दिवस को जारी किया गया था. इसके निर्माताओं का भरोसा है कि यह संभवत: विश्व की सबसे ज्यादा पीतल के पन्नों की किताब है. इस किताब में भारतीय संविधान को हिंदी, संस्कृत और मराठी में छापा गया है. साथ ही इसमें अमर शहीदों के चित्र, भारतीय रियासतों, लोक सभा व राज्य सभा के प्रक्रिया व कार्य संचालन नियमों को भी सम्मिलित किया गया है.

संविधान से देश पुस्तक में विश्व के 193 देशों के प्रतीक चिन्हों को भी छापा गया हैं. इस अनोखे दस्तावेज को तैयार करने के लिए धन केवल भारतीय नागरिकों से लिया गया है. किताब में पीतल की शीट 48 गेज की है, लेजर के माध्यम से किताब को प्रिंट किया गया. लेजर करने के लिए पीएलटी फाइल तैयार की गई. पेज साइज 5 इंच चौड़ा व 7 इंच लम्बा है, पेज में दो छेद किए गए हैं और सभी पृष्ठों को हाथों से काटा गया है. लेजर से छपाई में 299 घंटों का समय लगा है. संविधान से देश पुस्तक द्वारा इसके पूर्व में 193 देशों के संविधानों की 4 फिट की 57 किलो की किताब 2023 में, भारतीय संविधान की 54 पृष्ठ की 32 किलो की किताब 2022 में पीतल पर ही बनाई गई है. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और भारतीय संविधान सभा गृह भी 2023 में पीतल से बनाया गया है. ‘संविधान से देश पुस्तक’ अभियान के तहत विश्वभर के 193 देशों के संविधानों का संग्रहण व अध्ययन करने का कार्य किया जा रहा है. संविधान जागृति हेतु अनूप जलोटा द्वारा गाया गया संविधान गीत भी इसी अभियान का हिस्सा है, जो यों है –

है आंख वो, जो संविधान का दर्शन किया करे.
है शीश वो जो लोकतंत्र में वंदन किया करे .
बेगार वो मुख है, जो रहे व्यर्थ बातों में.
मुख वो है, जो संविधान का सुमिरण किया करे.
हीरे मोती से नहीं शोभा है हाथ की.
है हाथ वो जो न्याय का पूजन किया करे.
मरकर भी अमर नाम है, उस महामानव का जग में…