
हिंदी भाषा को बल प्रदान करने और विस्तार देने के लिए दैनिक जागरण ने एक ऐतिहासिक मुहिम शुरू की – ‘हिंदी हैं हम’। इसके अंतर्गत हिंदी के इतिहास में पहली बार वैज्ञानिक तरीके से ‘दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर’ की सूची का प्रकाशन किया गया। हिंदी के शीर्ष समाचार पत्र होने के अपने दायित्व को समझते हुए दैनिक जागरण ने हिन्दी में बेस्टसेलर की अवधारणा को प्रारंभ किया। वर्ष की प्रत्येकतिमाही में ‘दैनिक जागरण हिन्दी बेस्टसेलर’ की घोषणा की जाती है जिसका प्रकाशन दैनिक जागरणके समस्त संस्करणों में होता है। हिंदी बेस्टसेलर को चार श्रेणियों में बांटा जाता है–कथा, कथेतर, कविता और अनुवाद। पाठकों को पुस्तकों के रिश्ते को मजबूत करने और पुस्तकों की जानकारी देने के दैनिक जागरण के इस उपक्रम का हिंदी जगत में व्यापक स्वागत हुआ।
‘हिंदी हैं हम’ के अंतर्गत प्रतिवर्ष चार स्थानों, दिल्ली, लखनऊ, देहरादून और पटना में ‘जागरण संवादी’ के नाम से एक आयोजन होता है। देशभर में लिटरेचर फेस्टिवल की भीड़ के बीच ‘जागरण संवादी’ एक ऐसा मंच है जहां अभिव्यक्ति का उत्सव मनाया जाता है। हिंदी की व्याप्ति बढ़ाने और युवाओं को अपनी भाषा से जोड़ने के लिए ‘जागरण संवादी’ में भाषाओं और विधाओं की परिधि से बाहर निकलकर मंथन होता है। दो दिनों के इस कार्यक्रम में देशभर के दिग्गजों का आमंत्रित किया जाता है। साहित्य, कला, संस्कृति, सिनेमा, खेल, संगीत, जैसे क्षेत्रों के उन लोगों को आमंत्रित किया जाता है जो भारत और भारतीयता के सदर्भ में अभिव्यक्ति के माध्यम का उपयोग करते हैं।
अपनी भाषा हिंदी में मौलिक शोध को बढ़ावा देने के लिए हिंदी हैं हम के अंतर्गत दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति की शुरुआत की गई थी। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के अंतर्गत राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थनीति और कूटनीति आदि में हिंदी में मौलिक शोध कराने के लिए शोधार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के आवेदन पर सम्मानित निर्णायक मंडल मंथन कर विषय और शोधार्थी का चयन करते हैं। चयनित विषय पर शोधार्थी को कम से कम छ: महीने और अधिकतम नौ महीने के लिए दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति दी जाती है। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के लिए अंतराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक हर महीने 75000 रुपए मानदेय दिए जाने का प्रावधान है। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के दौरान चयनित शोधार्थी को हर तीन महीने पर अपने कार्य की प्रगति रिपोर्ट विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत करनी होती है। शोध की समाप्ति के बाद शोधार्थी को करीब दो सौ पन्नों की एक पुस्तक प्रस्तुत करनी होगी। दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के तहत किए गए शोधकार्य के प्रकाशन में दैनिक जागरण मदद करता है। लेकिन पुस्तक पर शोधार्थी का सर्वाधिकार सुरक्षित होगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक तीन पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है।
‘हिंदी हैं हम’ मुहिम के तहत पुस्तक और पाठक संस्कृति के विकास के लिए जागरण सान्निध्य की शुरुआत की गई। इस मंच का उद्देश्य भारतीय भाषा के लेखकों और हिंदी के लेखकों–पाठकों के साथ संवाद है। एक दिन के इस आयोजन में लेखकों के साथ उसकी नवीनतम कृति और हिंदी भाषा और साहित्य की नई प्रवृत्तियों पर चर्चा की जाती है। श्रोताओं के तौर पर साहित्य से जुड़े लोगों के अलावा अन्य क्षेत्र के लोगों की भागीदारी होती है ताकि हिंदी पढ़ने की आदत का विकास हो सके। यह हिंदी की व्याप्ति बढाने का प्रयास है। ये कार्यक्रम कई शहरों में किया जाता है।




