संपूर्ण अधिकार मिले तो बेटियां बना सकती हैं सरकार
बिहार संवादी
सत्र : बिहार की बेटियां
प्रभात रंजन, जागरण
पटना : प्रदेश में आधी आबादी पर विमर्श हुआ तो बात राजनीति में भागीदारी से लेकर शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य व आरक्षण तक पहुंची। बेटियों को हर क्षेत्र में प्रतिनिधित्व व बेटों की तरह अधिकार व स्वतंत्रता पर बल दिया गया। आज भले वे सड़क से लेकर सदन सशक्त नजर आती हैं, लेकिन उनके अधिकारों का हनन भी हो रहा है। पार्टी अपने स्तर से महिलाओं को आरक्षण दें। चुनाव का जब समय आता है तो उन्हें टिकट देने से वंचित कर दिया जाता है। इसके पीछे उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखा जाता है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। महिलाओं को जब संपूर्ण अधिकार मिलेगा तो वे मुख्यमंत्री, मंत्री क्या प्रधानमंत्री बन सकती हैं। बिहार की बेटियां सत्र में विधायक प्रतिमा दास व दैनिक जागरण के उप समाचार संपादक मनोज राय संवाद के सिलसिले को आगे बढ़ाते रहे।
प्रतिमा ने महिलाओं की लिए परिवार पहली प्राथमिकता बताया तो इनके समर्थन में श्रोताओं के हाथ तालियों के लिए उठ खड़े हुए। उदाहरण के तौर पर कहा कि आज बेटियां पुलिस, प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य समेत अन्य क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं। दूसरा पक्ष यह भी है कि बेटियों को नौकरी के लिए अपना गृह जिले छोड़ना पड़ता है। ऐसे में वे अपने परिवार से दूर रहने को विवश होती हैं। दूर दराज की बेटियों के लिए सरकारी स्तर पर आवासीय व्यवस्था का अभाव और इसके साथ सुरक्षा सबसे बड़ी बात है। समय के साथ सब कुछ बदलने के बावजूद आज भी महिलाओं में असुरक्षा का भाव है। ऐसे में बेटों को अच्छे संस्कार देने की जरूरत है। संवादी के मंच से यह बात भी प्रमुखता से उठी कि ग्रामीण महिलाओं के कार्य को न तो सम्मान मिलता है और न ही उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया जाता है। ऐसे में पुरुष सत्ता का हावी होना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में विचार आता है कि ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ना अत्यंत जरूरी है। बेटियों को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका उनके माता-पिता की होती है। प्रतिमा की बातों में बेटियों के प्रति मुखर स्वर को सुन सभागार में बैठे अभिभावकों व छात्र-छात्राओं ने तालियां बजाकर पूरा समर्थन किया। बेटियों के मन से समाज के डर को खत्म करना होगा। इसके लिए अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करना होगा। उनकी भावनाओं को समझना होगा। बेटियों को उनके निर्णय पर भरोसा दिलाना होगा। उनके हर कदम पर साथ देना माता-पिता के साथ सबसे जरूरी है। संवाद का सिलसिला आगे बढ़ते हुए सवाल-जवाब तक पहुंचा। वक्ताओं के प्रश्नों पर अतिथि वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के अधिकार और उनके निर्णय पर हस्तक्षेप ठीक नहीं है। महिलाओं को स्वतंत्रता के साथ उनके जीवन जीने का पूर्ण अधिकार मिले।