मुंबई: वाणी प्रकाशन समूह द्वारा मुक्ति आडिटोरियम में आयोजित धर्मवीर भारती जन्म शताब्दी समारोह में समीर अंजान की ‘समीर लफ्जों के साथ एक सफनामा’ पर चर्चा हुई, जिसमें प्रशंसित गीतकार समीर ने अपनी रचनात्मक यात्रा के बारे में यूनुस खान के साथ विचारोत्तेजक बातचीत की. समारोह में नरेश सक्सेना ने भी अपने विचार व्यक्त किए. धर्मवीर भारती की विरासत पर असगर वजाहत, अरविंद गौर, अतुल तिवारी, अरुण माहेश्वरी, पीयूष मिश्रा, विश्वनाथ सचदेव जैसे दिग्गजों ने चर्चा की. इन सबने समकालीन साहित्य, रंगमंच और फिल्म जैसी विधाओं पर भारती के प्रभाव पर बातचीत की. उत्सव का समापन ‘द लव स्टोरी आफ फाइव जेनरेशन’ में एक भावनात्मक पाठ के साथ हुआ. इस सत्र में अभिनेता सीमा पाहवा, पंकज त्रिपाठी, दिव्या दत्ता, विनीत कुमार, सुतापा सिकदर, हिमानी शिवपुरी और अनूप सोनी द्वारा भारती की गुनाहों का देवता और अंधा युग के अंशों को जीवंत करते हुए आकर्षक प्रदर्शन किए गए. ‘गुनाहों का देवता’ की सूत्रधार अदिति माहेश्वरी थीं और ‘अंधा युग’ के अतुल तिवारी.
वाणी प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि धर्मवीर भारती की रचनाओं ने हिंदी साहित्य की आत्मा को आकार दिया है. यह शताब्दी समारोह उनकी प्रतिभा का सम्मान करने और लेखकों और पाठकों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने का हमारा विनम्र प्रयास है. अदिति माहेश्वरी गोयल ने कहा कि वाणी प्रकाशन अपने 61वें वर्ष का जश्न मना रहा है, यह उत्सव कालातीत क्लासिक्स और समकालीन आवाजों के बीच एक सेतु का प्रतिनिधित्व करता है, जो सुनिश्चित करता है कि भारती की विरासत निरंतर सहेजी जा सके.” कार्यक्रम में भारती की पत्नी पुष्पा भारती और बेटी प्रज्ञा भारती उपस्थित थे. याद रहे कि इलाहाबाद में जन्मे धर्मवीर भारती की कृतियों में ‘गुनाहों का देवता’, ‘सूरज का सातवां घोड़ा’, ‘अंधा युग’ और ‘युद्ध यात्रा’ आदि शामिल हैं. उनकी रचनाएं समय और भूगोल से परे हैं, जो भारतीय समाज और मानवीय भावनाओं की जटिलताओं को दर्शाती हैं. पद्म श्री और व्यास सम्मान जैसे पुरस्कारों से सम्मानित भारती का साहित्यिक योगदान हिंदी साहित्य की आधारशिला बना हुआ है. धर्मवीर भारती जन्म शताब्दी महोत्सव में मुंबई के कई साहित्य प्रेमी, शिक्षाविद और संस्कृत कर्मी उपस्थित थे.