नई दिल्ली: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री डा जितेंद्र सिंह ने मुक्त विश्वविद्यालय संस्कृति और बुनियादी हिंदी जागरूकता कार्यक्रम की खुलकर सराहना की है. जम्मू स्थित इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र के 38वें दीक्षांत समारोह में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से ‘मुक्त विश्वविद्यालय की संस्कृति’ को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा. दीक्षांत समारोह को आनलाइन संबोधित करते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री-स्वतंत्र प्रभार, पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री- स्वतंत्र प्रभार, प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग एवं अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री डा जितेंद्र सिंह ने शिक्षा परिदृश्य को, खासकर सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के कारण औपचारिक शैक्षिक व्यवस्था तक पहुंचने में असमर्थ रहने वाले लोगों के लिए, बदलने में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ‘इग्नू’ की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनईपी 2020 की प्रवेश एवं निकास की लचीली व्यवस्था, पसंद पर आधारित क्रेडिट सिस्टम और विविधतापूर्ण शिक्षण के अवसर जैसी प्रगतिशील विशेषताएं इग्नू जैसे मुक्त विश्वविद्यालयों के उद्देश्यों के अनुरूप हैं.

डा जितेंद्र सिंह ने एनईपी 2020 के महत्त्व के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों को व्यक्तिगत पसंद और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के आधार पर विषयों को बदलकर या उन्हें संयोजित करके अपने सीखने के मार्ग में विविधता लाने में सक्षम बनाता है- एक ऐसा दृष्टिकोण जिसे इग्नू द्वारा पहले से ही अपनाया जा रहा है. डा सिंह ने कहा, “लचीली डिग्री, पसंद पर आधारित क्रेडिट और विषयों को बदलने या संयोजित करने की क्षमता सहित कई विशेषताएं एनईपी 2020 में शामिल की गई हैं, जो इग्नू को शैक्षिक परिदृश्य में सही अर्थों में एक अग्रणी संस्था बनाती हैं.” विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने इग्नू की वैश्विक पहुंच की प्रशंसा करते हुए कहा कि 15 देशों में इसके 25 विदेशी अध्ययन केन्द्र हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति है. इसके अलावा, नौ देशों में विदेशी नागरिकों के लिए तीन महीने का आनलाइन बुनियादी हिंदी जागरूकता कार्यक्रम चलाने हेतु इग्नू के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद  और केंद्रीय हिंदी निदेशालय के साथ सहयोग की भी सराहना की गई. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ई-विद्याभारती और ई-आरोग्य भारती नेटवर्क परियोजना के माध्यम से 19 अफ्रीकी देशों में 45 आनलाइन कार्यक्रम पेश किए जा रहे हैं. केंद्रीय मंत्री ने 1985 में स्थापना के बाद से इग्नू की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की. उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि अब यह विद्यार्थियों के नामांकन के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है और इसे ए++ की मान्यता हासिल है. प्रवेश एवं निकास की लचीली व्यवस्था, माड्यूलर कार्यक्रम डिजाइन और मल्टीमीडिया-आधारित शिक्षा जैसी इग्नू के पाठ्यक्रमों की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए, डा सिंह ने कहा कि ये नवाचार विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, जिससे वे अपनी गति और सुविधा के अनुसार सीखने में सक्षम होते हैं.