हिन्दी बेस्टसेलर – जुलाई से सितंबर 2017
7. साक्षी भाव
नरेन्द्र मोदी, अनुवाद: प्रेमशंकर भट्ट और अमिता भट्ट ‘क्षमा’, प्रभात प्रकाशन
8. महाभारत के राज, ड्रूइड का रहस्य
क्रिस्टोफर सी डोयेल, अनुवाद: धीरज गोयल, वेस्टलैंड लिमिटेड
10. नरेन्द्र मोदी - एक राजनीतिक कथा
किंशुक नाग, अनुवाद: अवनि शर्मा प्रकाशक, मंजुल पब्लिशिंग हाउस
हिंदी में क्राइम फिक्शन के बादशाह सुरेन्द्र मोहन पाठक का ये नया उपन्यास है। एक लड़की की मौत और ब्रीफकेस में छुपे राज के इर्दगिर्द स्सपेंस का ऐसा ताना बाना हीरे को लेकर भी गजबब का रोमांच है जो पाठकों को अंत तक बांधे रखता है। सुरेन्द्र मोहन पाठक के इस उपन्यास में रोचकता पाठकों को अंत तक बांधे रखती है।
‘दिल्ली दरबार’ छोटे शहरों के युवाओं के दिल्ली प्रवास, प्रेम, प्रयास और परेशानियों की एक प्रहसनात्मक कहानी है। यह कहानी दरअसल उन लाखों युवाओं के जीवनशैली की भी है जो बेहतर ज़िंदगी और भविष्य की संभावनाओं के लिए दिल्ली जैसे महानगर का रास्ता लेते हैं।
ये कहानी है एक छोटे से शहर के लड़के नील की जो यूनिवर्सिटी आता है तो उसके सामने एक नई दुनिया खुलती है। वहां एक लड़के रणदीप से उसकी गहरी दोस्ती होती है । इसके बाद दोनों को प्यार होता है। नील अदिति के बीच प्यार की पींगे बढ़ती है तो रणदीप रिया से एकतरफा प्यार करने लगता है। रिया आत्महत्या करती है और इल्जाम लगाती है नील पर। अब कहानी जबरदस्त मोड़ लेती हुई पाठकों को चौंकाती है।
यह उपन्यास काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रावासीय जीवन का रेखाचित्र खींचता है, बल्कि कह सकते हैं कि ये होस्टल दिनचर्या का रोजनामचा है। इस किताब की भाषा में वही औघड़पन एवं बनरासपन है जो वहां के जीवन में है। शैक्षिक जीवन के हर पहलू को समाहित करता यह उपन्यास दिल, दोस्ती और धोखे की कहानी बयान करता है।
मुसाफिर कैफे कहानी है उन सारे लोगों की जो अपनी विश लिस्ट पूरी करते हुए परफैक्ट लाइफ खोजने के लिए भटक रहे हैं। लेखक दिव्य प्रकाश दुबे ने धर्मवीर भारती को अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए ‘गुनाहों का देवता’ के मशहूर तीन चरित्रों सुधा, चंदर एवं पम्मी को पुनर्जीवित किया है।
जिंदगी आइस पाइस और नमक स्वादानुसार जैसी पुस्तकों के लेखक निखिल सचान का ये पहला उपन्यास है। निखिल का ये उपन्यास बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के आईआईटी के परिवेश में बुनी एक इंजीनियर के इश्क और शिक्षा व्यवस्था से उसके मोहभंग की कहानी है। यह हिंदी में एक मए तेवर का उफन्यास है।
मसाला चाय’ की कहानियों को पढ़ना ऐसे ही है जैसे अपने कॉलेज की कैंटीन में सालों बाद जाकर दोस्तों के साथ चाय पीते हुए गप्पे मारना। बिल्कुल बोलचाल की भाषा में लिखी हुई किताब। आपको पढ़ते हुए ऐसा लगेगा जैसे लेखक जैसे लेखक कहानियाँ पढ़कर सुना रहा है।
इस कहानी संग्रह में लेखक मानव कौल ने उन विषयों को उठाया है जो हर पाठकों के मन को छूता है और उनको अपनी सी लगती है। इनकी कहानियों में पाठकों को कविता पढ़ने का सुख मिल सकता है। इस संग्रह की कहानियों में लेखक पाठकों को अपने बचपन की घटनाओं से जोड़ता है । लेखक की भाषा में रवानगी है।
इसमें लेखक के महानगर के अनुभवों की छोटी छोटी कहानियां हैं। लप्रेक यानि लघु प्रेमकथा के नाम से प्रचारित इस संग्रह में महानगर के अनेक रंग देखने को मिलते हैं, जो कहीं चटख हैं तो कहीं फीके। इन छोटी छटी कहानियों की भाषा में रवानगी है, जो इसको रोचक बनाती है।
जि़ंदगी आइस पाइस के किरदारों और क़िस्सों में जहाँ एक ओर नब्बे के दशक का नॉस्टैल्जिया है वहीं दूसरी ओर बीवी के प्यार में पड़कर क्यूट हो चुका डकैत मोहर सिंह है। ऐसा युवा भी है जो बदलते समय से उपजी बेचैनी और रोज़-ब-रोज़ इंसान और रिश्तों के मशीनीकरण से ऊबबर इनका अपने तरीक़े से परित्याग कर देता है।
अभिनेता, गीतकार, निर्देशक, संगीतकार पीयूष मिश्रा का ये कविता संग्रह है। इस संग्रह की कविताओं में पीयूष मिश्रा ने अपने सपनों, आकांक्षाओं, सफलता, असफलता और क्षोभ को वाणी दी है। अपने अङिनय से लोगों का दिल जीतनेवाले पीयूष की कविताएं भी पाठकों को एक अलग तरह का स्वाद देती है।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार विजय त्रिवेदी की ये किताब एक तरह से अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक जीवनी है। उन्होंने इस किताब में इस बात की पड़ता है कि वो क्या वजहें हैं जिससे अटल जी को सभी राजनीतिक दलों से प्यार मिलता रहा। अटल जी को जब भारत रत्न दिया गया तो किसी दल ने उसका विरोध नहीं किया।
वसीम बरेलवी का मानना है कि लफ्ज और एहसास के बीच का फासला तय करने की कोशिश का नाम है शायरी। इसी कोशिश का नतीजा है वसीम साहब की शायरी का ये संग्रह। इस संग्रह की शायरी पाठकों से बात करती सी लगती हैं और शायद इस वजह से पाठकों को बेहद पसंद आ रही है।
ये संग्रह रोमांटिक कविताओं का संग्रह है। इस संग्रह की कविताओं में कवि की कल्पना रोमांस के उन प्रदेशों में जाती है और ऐसे बिंबों को उठाती है जो युवा दिलों की धड़कनों को तेज कर देती है। कुमार विश्वास के इस संग्रह की कविताओं में युवा प्यार परवान चढ़ता है।
यह पुस्तक भारत में वामपंथ के विकास का अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसके अलावा 1917 से 1964 के बीच पूरी दुनिया के समाजवादी-साम्यवादी आंदोलनों, उसका भारत के स्वतंत्राता आंदोलन पर पड़े प्रभाव को भी कसौटी पर कसता है । शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ और अमेरिकी जासूसी एजेंसियों के क्रियाकलापों को भी सामने लाती है।
इस किताब में मशहूर गीतकार इरशाद कामिव की रोमानी डायरी की शायरी दर्ज है। इस किताब की शुरुआत में इरशाद कामिल खुद को एक अजनबी की तरह से देखते हैं। लेखक का मानना है कि इश्क से गैर जरूरी काम इस दुनिया में कोई नहीं है लेकिन वो ह भी मानता है कि इश्क ही दुनिया को जीने लायक बनाए हुए है। इश्क से लवरेज इस किताब से इरशाद कामिल की पहचान एक मजबूत हिंदी कवि के रूप में हुई थी।
इस काव्य संकलन में संकलित कविताएँ इस मायने में विशिष्ट हैं कि ये स्वयं अटलजी द्वारा चयनित हैं। इनका एक अन्य आकर्षक और विशिष्ट पक्ष है इनका प्रस्तुतिकरण। ये कविताएँ सुंदर और कलात्मक हस्तलिपि में तथा ललित-सुंदर भाव-चित्रों से सज्जित हैं। कविताओं में स्थित समस्त भाव अपने चित्रों में इस कलात्मकता एवं कुशलता से रचित हैं कि चित्रों को देखकर ही कविताओं का भाव सहज दृष्टिगत हो जाता है।
अभावग्रस्त स्थितियों से गुजरकर सफलता की बुलंदियों तक पहुंचनेवाले राजेश पाटिल की ये कहानी सिर्फ उनकी कहानी है बल्कि अनगिनत वैसे लोगों की कहानी है जो अभावग्रस्त जिंदगी जीते हुए एक मुकाम हासिल करते हैं। बाल मजदूरी के रूप में निरंतर संघर्षरत रहते हुए वो कलक्टर बनता है । जीवन में कुछ कर गुजरने के लिए प्रोत्साहित करती है ये किताब।
सिनेमा, संगीत और साहित्य के संगम के रूप में प्रस्तुत ‘लता :सुर-गाथा’ से गुज़रना लता मंगेशकर की सांगीतिक यात्रा का साक्षी बनना है। यह पुस्तक ब्रिटिश-युग से 21वीं शताब्दी तक सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन का दस्तावेज है। इसमें उन प्रभावों को एकत्र कर उन्हें समझने की कोशिश है ,जो राष्ट्र और उसकी आवाज़ को आकार देती है।
गुलजार की इस किताब में रेखांकन कनाडा में रहनेवाली लेखिका और चित्रकार रीना सिंह का है। ये एक ऐसी किताब है जो हिंदी से प्यार करनेवाले पाठकों को रोचक तरीके से उसके बारे में बताती है। ये किताब गुलजार की कविचाओ का पढ़ने का कायदा भी सिखाती है।
रामचंद्र सीरीज की इस दूसरी किताब में अमिश ने सीता की पारंपरिक छवि को समकालीनता के साथ पेश किया है। राम से स्वंवर क पहले का संवाद और फिर रावण के साथ युद्ध के पहले सीता के साथ राम का संवाद बेहद दिलचस्प है। सीता को एक योद्धा के तौर पर पेश करने के क्रम में अमिश ने उत्तर आधुनिक भाषा का प्रयोग किया है।
लेखक की मशहूर शिवा-त्रयी की पहली किताब है। इसमें भगवान शिव और हिंदू धर्म के मुताबिक कर्म की व्याख्या की गई है। इसकी कथा लगभग सिंधु घाटी सभ्यता के कालखंड में विचरण करती है और सूर्यवंशियों और चंद्रवंशियों के बीच के द्वंद को रेखांकित करती है।
यह शिवा-त्रयी की दूसरी किताब है। इस पुस्तक में मेलुहा को पता चल जाता है कि शिव की शक्ति का एहसास होता है और वो उनको अपना रक्षक नीलकंठ घोषित कर देता है। इसमें शिव के दक्ष की पुत्री सती से विवाह की भी रोचक कहानी है। शिव और सती की यात्रा का वर्णन भी है।
यह शिवा-त्रयी का तीसरा उपन्यास है जिसमें शिव पहुंचते हैं नागाओं के प्रदेश में और वहां उनकी मुठभेड़ होती है। उस उपन्यास में वृहस्पति के गायब होने और फिर वापस आने की भी रोचक कथा है। इसके अलावा नीलकंठ के योद्धा से रक्षक बनने की भी दिलचस्प कहानी है।
यह लेखक की रामचंद्र श्रंखला की पहली किताब है। क्या राम अपने पर लग रहे लांक्षणों से उबर पाएंगें, क्या वो विष्णु की नियति पर खरे उतर पाएंगे, क्या सीता के प्रति उनका प्यार संघर्षों के दौरान उनको थाम लेगा। इस किताब में लेखक इन्हीं सवालों के उत्तर ढूंढते हैं।
इस पुस्तक में देवदत्त ने गीता को अपने तरीके अनूदित और व्याख्यायित किया है। इसमें गीता की मूल कहानी को बचाते हुए उसको आधुनिकता के संदर्भों के साथ पेश किया गया है। कृष्ण की सीख को भी आधुनिक संदर्भों में रखा गया है। यह पुस्तक नए पाठकों के लिए मददगार हो सकती है।
नरेन्द्र मोदी लिखित इस पुस्तक में उनके विचार हैं जहां उनको उज्जवल भविष्य का प्रकाश पुंज दिखाई देता है। उनसे देश की अपेक्षाओं का एहसास है लेकिन अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने की हड़बड़ी नहीं है। जहां लेखक अपने न्यायप्रिय होने की कामना करता है ।यह ग्रंथ डायरी के रूप में जगज्जननी मां से संवाद के रूप में व्यक्त उनके मनोभावों का संकलन है।
इस किताब में लेखक ने महाभारत के उन रहस्यों की परतें खोलने की कोशिश की गई है जहां उसके तार ब्रिटेन से जुड़ते हैं। ड्रूइड का रहस्य क्या था इसको पाठकों के सामने विस्तर से रखा गया है । क्रिस्टोफर डोयल एक ऐसे लेखक हैं जो पाठकों को पुरातन रहस्यों की उस दुनिया में ले जाते हैं जो काल की परतों के नीचे दफन हो चुके हैं।
जब पांच साल की शिवगामी देखती है कि उसके पिता को महिषमथी के राजा के द्वारा विश्वासघाती करार दिया जाता है और उनको मौत की सजा सुनाई जाती है तो उसी समय वो तय कर लेती है कि वो राज्य को नेस्तानाबूद कर देगी। शिवगामी जैसे जैसे बड़ी होती वैसे वैसे ये कहानी बेहद दिलचस्प और रोचक होते जाती है। इंतकाम की इस कहानी में रोमांच बहुत है।
इस किताब के केंद्र में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी हैं। इस किताब में ना केवल नरेन्द्र मोदी की शुरुआती जिंदगी की कहानी है बल्कि उसमें भविष्य के राजनेता के तौर पर मजबूत छवि का भी आकलन किया गया है। लेखक ने इस किताब में नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व के आयामों की भी चर्चा की है।