नई दिल्ली: “अगर हम नेतृत्व करना चाहते हैं, तो हमें शोध और नवाचार को प्राथमिकता देनी होगी. बिना शोध या नए विचारों के क्रियान्वयन के दुनिया में कोई आगे नहीं बढ़ सकता. राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भारत के बदलते चेहरे की नुमाइंदगी करता है. मैं विश्वविद्यालय की बी-कोर पहल को ‘भारत का मूल’ कहूंगा, क्योंकि बदलाव के इस दौर में यह देश, अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता दे रहा है.” यह बात राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में पहले अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक अनुसंधान सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डा मनसुख मांडविया ने कही. इस चार दिवसीय सम्मेलन का मकसद 2036 ओलंपिक हेतु भारत की दावेदारी को मजबूत करने के लिए, वित्तीय स्थिरता, रणनीतिक योजना और सहयोगी नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत को वैश्विक ओलंपिक जगत में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना है. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला, कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ने खेल और ओलंपिक में शोध पर ध्यान केंद्रित करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. डा मांडविया ने कहा कि ओलंपिक केवल प्रतियोगिताएं नहीं हैं, बल्कि खेलों की हमारी जीवनशैली में अभिन्न भूमिका का प्रतीक हैं.
मंत्री डा मांडविया ने कहा कि पीएम मोदी ने 2036 में ओलंपिक की मेजबानी की कल्पना की है, जो भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक है. जैसे-जैसे हम एक विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, देश 2047 में अपनी स्वतंत्रता का शताब्दी वर्ष मनाएगा. तब तक भारत विकसित देशों में से एक होगा. नागरिकों के बीच न केवल शारीरिक फिटनेस, बल्कि मानसिक फिटनेस सुनिश्चित करने में फिट इंडिया की अहम भूमिका है. मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति एक आदर्श समाज के निर्माण में योगदान देता है, जो एक समृद्ध राष्ट्र का मार्ग प्रशस्त करता है. इसलिए खेल हमारी बढ़ती ताकत का प्रतीक है. मोदी ने 2036 तक भारत को खेलों में शीर्ष 10 देशों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है और आजादी के शताब्दी वर्ष तक हमारा लक्ष्य शीर्ष 5 में शामिल होना है. इसे हासिल करने के लिए हमें मैदान पर उतरना होगा, प्रतिस्पर्धा करनी होगी और जीतना होगा. जो जीतते हैं, वे अपनी छाप छोड़ते हैं और अपनी जीत को पदक में बदल देते हैं. खेल विज्ञान हमारी पदक तालिका बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए, जब हम ओलंपिक अनुसंधान के बारे में बात करते हैं, तो इसमें इसके सामाजिक, युवा, जोखिम और अंतर्राष्ट्रीय धारणा प्रभावों का अध्ययन शामिल होता है, जो मिलकर व्यापक ओलंपिक अनुसंधान बनाते हैं. अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष डा थामस बाक ने युवा विकास और राष्ट्र-निर्माण के लिए समग्र दृष्टिकोण बनाने हेतु खेल और शिक्षा के एकीकरण पर जोर देते हुए एक प्रेरणास्पद संदेश दिया.