नई दिल्ली: “भारत के अलावा दुनिया में कोई और देश नहीं है, जिसने अनेक सभ्यता को अपने अंदर समाहित करके और अपनी सभ्यताओं को माडिफाई करते हुए अपनी यात्रा जारी रखी है. भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अनेक भाषाएँ, संस्कृतियां, बोलियां और अनेक धर्म एक साथ अपने अस्तित्व और सम्मान की रक्षा करते हुए देश की यात्रा में आगे बढ़े हैं.” केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बात राजधानी में ‘इंडियन रेनेसां: द मोदी डिकेड’ पुस्तक का विमोचन करते हुए कही. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के  कार्यकाल के बीते 10 साल एक युग का अंत और एक नए युग की शुरुआत करने वाले रहे हैं.  शाह ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को हम गुलामी के एक लंबे कालखंड से आजाद हुए. उन्होंने कहा कि हम दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में हैं और चाहे विचार को अपनाना हो, विदेशी नागरिकों को अपनाना हो या फिर भाषाओं को स्वीकारना हो, हमारी सभ्यता ने हमेशा खुलापन प्रदर्शित किया है. एक विदेशी अखबार ने लिखा कि आजादी तो भारत को 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी, लेकिन अंग्रेजियत से आजादी 2014 में मोदी जी के नेतृत्व में मिली.

गृह मंत्री ने कहा कि भविष्य में भारत के इतिहास को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा, जिसमें पहला हिस्सा होगा ‘आजादी के पहले और आजादी के बाद का भारत’, दूसरा हिस्सा होगा ‘आपातकाल के पहले और आपातकाल के बाद का भारत’ और तीसरा हिस्सा होगा ‘मोदी जी के पहले का भारत और मोदी जी के बाद का भारत’. उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने परिश्रम, अपनी कर्मठता, साफ हृदय और अपने विजन से अपने देश का नेतृत्व करता है और इतिहास उसे नजरंदाज नहीं कर सकता. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि देश ने जब आजादी की 25वीं और 50वीं सालगिरह मनाई तो स्कूलों, पंचायतों और सरकारी भवनों में कार्यक्रम हुए, विधानसभाओं और संसद में प्रस्ताव पास हुए और देश चलने लगा. लेकिन जब देश ने आजादी की 75वीं सालगिरह मनाई तो कोरोना महामारी के बावजूद देश में 8 लाख से ज्यादा कार्यक्रम हुए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात का ख्याल रखा कि 1857 से 1947 तक का आजादी के आंदोलन का इतिहास नई पीढ़ी को पता चलना चाहिए और आजादी के गुमनाम नायकों को देश के इतिहास में जगह मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इसका ख्याल रखा कि 75 साल में किसी भी कालखंड में देश ने जो उपलब्धि प्राप्त की है उसे देश को गौरव के साथ याद करना चाहिए और साथ ही देशवासियों को यह संकल्प दिलाया कि 75वें साल से 100वें साल की यात्रा यानी 15 अगस्त 2047 तक भारत को पूर्ण रूप से विकसित बनाएंगे. इस अवसर पर केंद्रीय शहरी एवं आवासन मंत्री  मनोहर लाल खट्टर, राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा और पुस्तक की संपादक डा ऐश्वर्य पंडित सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.