अलाप्पुझा: “सैनिक शब्द न केवल योद्धा या युद्ध कला में निपुण होने का प्रतीक है; बल्कि यह इस तथ्य का भी प्रतीक है कि एक सैनिक में अनुशासन, समर्पण, आत्म-नियंत्रण व राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा जैसे कई गुण होते हैं. स्वामी विवेकानंद, आदि शंकराचार्य, श्री नारायण गुरु या राजा रवि वर्मा जैसे महान व्यक्तित्वों में यही गुण थे और सैनिक स्कूल समाज, विशेषकर युवाओं में इन मूल्यों को विकसित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं.” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात केरल के अलाप्पुझा जिले में विद्याधिराज विद्यापीठम सैनिक स्कूल का उद्घाटन करते हुए कही.  यह स्कूल उन 100 नए सैनिक स्कूलों में से एक है, जिन्हें गैर सरकारी संगठनों, संस्थाओं, निजी स्कूलों, राज्य सरकार के विद्यालयों के साथ साझेदारी में क्रमबद्ध तरीके से स्थापित किया जा रहा है. इसके अलावा मौजूदा 33 सैनिक स्कूल पहले से ही पूर्ववर्ती पैटर्न के तहत शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. रक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि स्कूल विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण, आत्म-नियंत्रण और राष्ट्र के प्रति सेवा के मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक स्कूल प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जो सामान्य शिक्षा से भिन्न है. यहां छात्रों को शैक्षणिक व शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसका उद्देश्य बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास करना है. उन्होंने कहा कि इस पहल से सशस्त्र बलों में शामिल होने की इच्छा रखने वाले लोग आसानी से अपना लक्ष्य हासिल कर लेते हैं. सिंह ने कहा कि इस प्रकार ‘रक्षा’ एवं ‘शिक्षा’ का संगम राष्ट्र निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है.

रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि सरकार एक ऐसे भारत का निर्माण करने के लिए सैनिक स्कूलों की स्थापना कर रही है, जिसका नेतृत्व वे लोग करेंगे जो अपने पूर्वजों द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलेंगे, उनके गुणों को अपनाएंगे और पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे. उन्होंने कहा कि स्कूल का नाम महान समाज सुधारक विद्याधिराज चट्टंबी स्वामी के नाम पर रखा गया है, जिनके कार्य एवं सामाजिक सुधार के प्रति उत्साह शिक्षा को आत्म-प्राप्ति और मातृभूमि की सेवा के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने की प्रेरणा के रूप में कार्य करते हैं. रक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सही मूल्यों को विकसित करने की दिशा में स्कूल प्रबंधन के प्रयासों की सराहना की. रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक स्कूल न केवल समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि लड़कियों को समान अवसर भी प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का मानना है कि जब सैनिक स्कूल बच्चों के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं, तो बालिकाओं को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता.” सिंह ने कहा कि एक तरफ जहां महिलाओं को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सैनिक स्कूल भी बड़ी संख्या में महिलाओं को सेना में शामिल होने के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह भारत को सशक्त, देशभक्त, गौरवान्वित और अनुशासित युवा नागरिकों के साथ प्रस्तुत करने के हमारे दृष्टिकोण को साकार करेगा, जो पूरे राष्ट्र की संपत्ति हैं.