ई-संवादी2019-01-08T12:31:33+00:00

विजय कुमार को शिवकुमार स्मृति सम्मान

By |February 21st, 2019|

आणंद:  हिंदी के वरिष्ठ आलोचक डॉ. शिवकुमार मिश्र की स्मृति में दिया जाने वाला सम्मान इस वर्ष प्रदान किए गए। आलोचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान वर्ष 2018 का सम्मान [...]

लिपि भाषा का लिबास होता है-जयकांत सिंह ‘जय’

By |February 21st, 2019|

पटना: लिपि भाषा का लिबास होता है, ये बात भोजपुरी के प्रसिद्ध साहित्यकार जयकांत सिंह 'जय'  ने प्रभा खेतान फाउंडेशन और मसि इंक द्वारा आयोजित ‘आखर’ कार्यक्रम में बातचीत के दौरान [...]

भारतीय भाषाओं के प्रति दृष्टिकोण रखकर ही हिंदी बन सकेगी राष्ट्रभाषा: प्रो चन्दन कुमार

By |February 21st, 2019|

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी महाविद्यालय के 'हिंदी साहित्य परिषद' द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला में 'हिंदी और हमारा देश' विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. चन्दन कुमार नेे वक्तव्य [...]

नामवर सिंह होने का मतलब या नामवर सिंह के अंतर्विरोध

By |February 21st, 2019|

प्रो जगदीश्वर चतुर्वेदीनामवर सिंह मोह मुक्त जीवन जीने की कला में  निष्णात थे। उनके मन और लेखन कर्म में झांकने पर वे एकदम दूसरे रूप में नजर आते हैं,आमतौर पर वे [...]

जिस तरह सबके अपने अपने राम हैं उसी तरह सबके अपने अपने नामवर भी हैं!

By |February 21st, 2019|

बोधिसत्वनामवर जी नहीं रहे। हर हिंदी वाले के पास नामवर जी के अनेक संस्करण और संस्मरण होंगे। मैं नामवर जी को लेकर बात यहीं से आरंभ करूं तो बेहतर होगा [...]

चला गया हिंदी का हिरामन

By |February 20th, 2019|

हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे। मंगलवार की रात 11.52 पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले दिनों नामवर सिंह [...]

साहित्य अकादमी में आयोजित ‘संवाद’ में जुटे दिग्गज रचनाकार

By |February 19th, 2019|

नई दिल्लीः साहित्य अकादमी के रविंद्र भवन सभागार में 'संवाद' के बैनर तले एक रचना गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें राजधानी दिल्ली और उसके आसपास रह रहे दिग्गज साहित्यकारों [...]

शंकर सुल्तानपुरी का जाना बाल साहित्य की बहुत बड़ी क्षति

By |February 19th, 2019|

लखनऊः हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर शंकर सुल्तानपुरी नहीं रहे. उन्होंने कहानी, कविता, नाटक, उपन्यास, एकांकी, रेडियो नाटक, चित्र- कथा जैसी अनेक विधाओं में सृजन किया और 500 से भी [...]