‘प्रवासी मंच’ कार्यक्रम में कमला दत्त एवं सुभाष जैरथ का रचना-पाठ

2019-01-12T15:50:03+00:00

नई दिल्लीः राजधानी में चल रहे विश्व पुस्तक मेले की गतिविधियों से इतर साहित्य अकादमी के सभाकक्ष में 'प्रवासी मंच' कार्यक्रम में अमेरिका से पधारी हिंदी की प्रतिष्ठित कथाकार एवं रंगकर्मी कमला दत्त एवं आस्ट्रेलिया से पधारे प्रख्यात कवि सुभाष जैरथ ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं. कमला दत्त की कहानी का शीर्षक था 'सैंडाई जाने वाले रास्ते पर तुम नहीं थे साथ'. कहानी एक प्रवासी युवती के बारे में थी जो विभिन्न देशों की यात्रा करते हुए विभिन्न मनोवैज्ञानिक स्थितियों से गुजरती है. इस कहानी में स्त्री और पुरुष के संबंध को बहुत बारीकी से परखा गया है. ज्ञात हो कि कमला दत्त की कहानियां सत्तर के दशक में धर्मयुग, सारिका, कहानी, हंस जैसी महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थीं और कई संकलनों में भी सम्मिलित हैं. आपने 2012 से फिर लिखना शुरू किया. आपकी कुछ प्रमुख प्रकाशित कृतियां हैं – मछली सलीब पर टंगी, कमला दत्त की यादगार कहानियां आदि. नाटक में भी आपकी विशेष रुचि है. भारत में उत्सर्ग, मुक्त धारा, नाटेर पूजा, गोदान, अधूरी आवाज, आषाढ़ का एक दिन, पगला घोड़ा आदि नाटकों में कमला दत्त ने मुख्य भूमिका निभाई थी. आप मोरेहाउस स्कूल ऑफ मेडिसिन अटलांटा जीए के पैथोलॉजी एंड एनाटोमी डिपार्टमेंट में 28 वर्षों तक अध्यापन के बाद 2012 में प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुईं.

 

इस मौके पर आस्ट्रेलिया से पधारे हिंदी, अंग्रेज़ी और रूसी भाषा के प्रख्यात कवि सुभाष जैरथ ने अपनी अंग्रेजी एवं हिंदी कविताएं प्रस्तुत कीं. अपने अंग्रेजी कविता-संग्रह 'यशोधरा: सिक्स सीजंस विदाउट यू', 'अनफिनिश्ड पोएम्स फॉर यॉर वॉयलिन' से उन्होंने अंग्रेजी कविताएं एवं अपने हिंदी कविता-संग्रह गोली लगने से पहलेसे हिंदी कविताएं सुनाईं. उनकी कविताओं का स्वर देश से दूर रह रहे किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का था, जो विभिन्न प्रतीकों के साथ अपने अस्तित्व को जांचना-परखना चाहता है. इस अवसर पर सुभाष जैरथ ने सुरेश ऋतुपर्ण की कविता 'हिरोशिमा की याद…' के अपने अंग्रेजी अनुवाद का भी एक अंश प्रस्तुत किया. खास बात यह कि मूल हिंदी कविता का पाठ स्वयं सुरेश ऋतुपर्ण ने किया. सुभाष जैरथ के तीन कविता-संग्रह तथा 5 गद्य और कथेतर की पुस्तकें प्रकाशित हैं. सुभाष जैरथ की रूसी, जापानी तथा पर्शियन भाषा से अंग्रेजी में अनूदित पुस्तकें भी प्रकाशित हैं. आपने भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई कवियों की कविताओं का भी हिंदी अनुवाद किया है. अभी आप सेंटर ऑफ क्रिएटिव एंड कल्चरल रिसर्च, यूनिवर्सिटी ऑफ कैनबरा में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. कार्यक्रम में सुरेश ऋतुपर्ण, नरेंद्र मोहन, पवन माथुर, देवेंद्र चौबे, शैलेंद्र शैल, दिनेश पंत, लखन पाल, राकेश श्रीवास्तव एवं कई महत्त्वपूर्ण लेखक तथा साहित्यप्रेमी उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन संपादक हिंदी अनुपम तिवारी ने किया.

About the Author:

Leave A Comment