अरूंधति राय की किताब ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ के हिंदी, उर्दू अनुवाद का लोकार्पण

2019-01-11T14:47:55+00:00

नई दिल्ली: दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन के स्टाल जलसाघर में सुप्रसिद्ध लेखिका अरुंधती राय के बहुचर्चित अंग्रेजी उपन्यास 'द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस' का हिंदी अनुवाद 'अपार खुशी का घराना' और उर्दू अनुवाद 'बेपनाह शादमानी की मुमलकत' का अनावरण और परिचर्चा हुई . इस उपन्यास का हिंदी अनुवाद वरिष्ठ कवि और आलोचक मंगलेश डबराल और उर्दू अनुवाद अर्जुमंद आरा द्वारा किया गया. उपन्यास को दोनों भाषाओं में राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकशित किया गया है. इस परिचर्चा में लेखिका अरुंधती राय, अनुवादक मंगलेश डबराल, अर्जुमंद आरा और राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी से युनुस खान ने विस्तार से बातचीत की. 'अपार ख़ुशी का घराना' एक साथ दुखती हुई प्रेम-कथा और असंदिग्ध प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है. उसे फुसफुसाहटों में, चीख़ों मेंआंसुओं के ज़रिये और कभी-कभी हंसी-मज़ाक़ के साथ कहा गया है. उसके नायक वे लोग हैं जिन्हें उस दुनिया ने तोड़ डाला है जिसमें वे रहते हैं और फिर प्रेम और उम्मीद के बल पर बचे हुए रहते हैं.

लेखिका अरुंधती राय ने 21 वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद उपन्यास  के आने पर अपने विचार रखते हुए कहा '1997 में 'गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स' पुस्तक  के 2-3 महीने बाद तत्कालीन भाजपा सरकार ने न्युक्लीयर टेस्ट किया था और मै इसके विरोध में थी, तब मुझे न्युक्लीयर पॉवर विरोध का प्रतिरूप  बना दिया गया था. उस समय मैंने यह निश्चय किया था कि जब मुझे कुछ कहना होगा तब लिखूंगी.' हिंदी और उर्दू में उपन्यास के आने के बारे उन्होने कहा 39 भाषाओं में यह पुस्तक अनुवादित हो चुकी है मगर आज मुझे अपार खुशी का आभास हो रहा है कि यह पुस्तक हिंदी और उर्दू में भी आ गई है.' कवि और आलोचक मंगलेश डबराल ने अनुवाद के समय के अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि इस उपन्यास के शीर्षक के लिए काफी कश्मकश थी. महकमा’ ‘मंत्रालयआदि शब्दों  के बाद घरानापर मुहर लगी'. आगे उन्होंने कहा इस उपन्यास में मुस्लिम एलजीबीटी, दलित समाज के प्रति सहानुभूति देखने को मिलती है.उर्दू में अनुवाद करने वाली लेखिका अर्जुमंद आरा ने अपने अनुभव के बारे में बताते हुए कहा इस उपन्यास को अरुंधती द्वारा जिस तरह लिखा गया है और जिस तरह शब्दों का चुनाव उपन्यास में किया गया था, उनको ज्यों का त्यों खासकर उर्दू में अनुवाद करना काफी कठिन था. मगर मुझे गर्व है कि इस तरह का उपन्यास अनूवाद करने का मुझे मौका मिला.' अशोक महेश्वरी ने कहा 'यह अपार हर्ष का मौका है कि इस पुस्तक का अनुवाद हिंदी और उर्दू पाठकों के लिए आया है. यह एक ऐतिहासिक क्षण है कि किसी उपन्यास का हिंदी और उर्दू अनुवाद साथसाथ आया है.

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