शशि थरूर की किताब ‘मैं हिन्दू क्यों हूं’ का लोकार्पण

2018-12-06T07:40:41+00:00

नई दिल्लीः स्तम्भकार, लेखक और नेता डॉ. शशि थरूर की 'वाणी प्रकाशन' से प्रकाशित किताब 'मैं हिन्दू क्यों हूं' का लोकार्पण दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ. इस दौरान शशि थरूर ने धर्म की बहुलता और सहिष्णुता को रेखांकित किया और स्वामी विवेकानंद की दार्शनिक विचारधारा को याद किया. उन्होंने हिन्दूवादी, हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद के आशय को स्पष्ट करते हुए राजनीतिक हिन्दूवाद के रास्ते संविधान पर उठते हुए संकट को भी रेखांकित किया. इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या मसले के कारण उत्पन्न हुए राजनीतिक माहौल में एकध्रुवीय बनती सोच पर भी चर्चा की. वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने हिन्दूवाद को हिन्दूइज़्म का अनुवाद उपयुक्त न मानते हुए कहा यह किताब कथ्य और संप्रेष्य के स्तर पर विचार करने को प्रेरित करती है. उन्होंने बदलते हुए परिदृश्य में साम्प्रदायिकता के परिणामों पर सचेत किया ओैर किताब को महत्त्वपूर्ण माना. वरिष्ठ नेता देवी प्रसाद त्रिपाठी का कहना था कि हिन्दू धर्म की मूल भावना बहुलता, सहिष्णुता व सहकार है. उन्होंने कहा कि दूसरों का उपकार ही धर्म है और दूसरों का अपकार पाप है. इसके अलावा उन्होंने धर्म में नवीन धारणाओं और आस्थाओं को भी महत्त्वपूर्ण मानते हुए धर्म को सतत गतिशील कहा.
प्रोफेसर अभय कुमार दुबे की राय में हिन्दुत्ववादियों का मूल मक़सद एक नस्लीय और जातिवादी राजनैतिक कम्युनिटी बनाना है. सावरकर के राजनीतिक उद्देश्यों को तार्किक रूप से सामने रखते हुए उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य बहुलतावादी भारतीय दृष्टि के विपरीत है और वे हिन्दू राष्ट्रवाद के समर्थक हैं. लोकतान्त्रिक सरकारों में उपस्थित बहुसंख्यक आवेश की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें वोट के लिए तुष्टिकरण सभी सरकारों की नीति रही है, जो खासतौर पर मुस्लिम वोट पाने के लिए अपनायी गयी, अभय कुमार दुबे ने बहुसंख्यकवाद के सौम्य ख़तरों के प्रति आगाह किया. तसलीमा नसरीन ने मुस्लिम समाज और राजनीति में कट्टरता को पाकिस्तान और बांग्लादेश के सन्दर्भ में उजागर करते हुए मुस्लिम स्त्रियों के अधिकारों के अपवंचन का मुद्दा उठाया. अभिव्यक्ति के बन्धनों के सन्दर्भ में भी उन्होंने सवाल उठाये और अपने निर्वासन को याद करते हुए भारत के उदात्त स्वरूप, धर्म के बौद्धिक लचीलेपन को भी रेखांकित करते हुए शशि थरूर की किताब को महत्त्वपूर्ण बताया. लोकार्पण समारोह में वाणी प्रकाशन की ओर से प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी लीलाधर मंडलोई, कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल और दामिनी माहेश्वरी भी मौजूद थीं.

 

About the Author:

Leave A Comment