नहीं रहे लेखक डॉ. पीयूष गुलेरी, साहित्यजगत में शोक

2018-12-05T22:52:48+00:00

शिमला: हिमाचल के प्रसिद्ध साहित्यकार डा. पीयूष गुलेरी नहीं रहे. उनके निधन की खबर सुनते ही साहित्य जगत और सोशल मीडिया में उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई. पीयूष गुलेरी कुछ समय से बीमार चल रहे थे. डा. पीयूष गुलेरी हिंदी तथा हिमाचली भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकारों में से एक थे. पीयूष गुलेरी का जन्म 14 अप्रैल, 1940 को साहित्य एवं चित्रकला के लिए प्रसिद्ध कांगड़ा के गुलेर में राजपुरोहित पिता पंडित कीर्तिधर शर्मा गुलेरी एवं माता सत्यवती गुलेरी के यहां हुआ था. उनका मूल नाम कृष्ण गोपाल था. उनके साहित्यिक गुरु सोमनाथ सिंह ने उन्हें पीयूष उपनाम दिया था. डॉ. गुलेरी ने हिंदी, संस्कृत, हिमाचली, डोगरी, पंजाबी, उर्दू व अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में अपना साहित्यिक योगदान दिया था. पीयूष गुलेरी ने पांचवीं कक्षा के छात्र रहते हुए ही कविता, गीत, संगीत, नृत्य, अभिनय सहित अन्य विधाओं में भाग लेना आरंभ कर दिया था. वह लेखक साहित्यकार के साथ उम्दा अध्यापक भी थे. उन्होंने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धर्मशाला में अपनी सेवाएं प्रदान कीं. इसके अलावा उन्होंने चंद्रधर शर्मा गुलेरी महाविद्यालय तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र धर्मशाला सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी अपनी सेवाएं प्रदान की.
डा. पीयूष गुलेरी की पहली किताब 1969 में प्रकाशित हुई जिसका नाम था 'मेरा देश म्हाचल'. इसके अलावा उनके छौंटे, मेरियां, गज़लां सहित अन्य संकलन प्रकाशित हुए. इन्होंने नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया की ओर से किरनी झुल्लां दीशीर्षक से कहानी-संकलन का सपांदन भी किया. चंद्रधर शर्मा गुलेरी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर उनका शोध-प्रबंध प्रकाशित और चर्चित रहा. साहित्य, शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले थे, जिनमें 1972 में हिमाचल प्रदेश साहित्य अकादमी सम्मान, हिम हम्मीर, संध्यापुरी, हिमाचल केसरी, फ्रैंड्स यूनिवर्सल अवार्ड, हिंदी-साहित्य सम्मेलन ताशकंद सम्मान, पुरोहित चंद्रशेखर राष्ट्रीय पुरस्कार, यशवंत सिंह परमार सम्मान आदि शामिल हैं. डॉ. गुलेरी ने आधुनिक हिमाचली भाषा को साहित्यिक स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई थी. उनके निधन की सूचना मिलते ही देश भर के साहित्यकारों ने दुख जाहिर किया, जिनमें राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्य्क्ष बल्देव भाई शर्मा, प्रसिद्ध साहित्यकार उषाकिरण खान, व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय, दिविक रमेश, लालित्य ललित, प्रज्ञा पाण्डेय, साधना अग्रवाल आदि शामिल हैं.

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