शारजाह अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में बिक रहीं हिंदी की किताबें

2018-11-08T14:08:19+00:00

शारजाह: भारतीय भाषाओं की पुस्तकों के प्रकाशन और 'पुस्तक संस्कृति' को बढ़ावा देने के लिए समर्पित राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत जो नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के नाम से अधिक मशहूर है शारजाह में 31 अक्टूबर से 10 नवंबर तक लगे 'अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला' में भागीदारी कर रहा है. न्यास ने मेले में 35 भारतीय प्रकाशकों द्वारा हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मलयालम और तमिल भाषाओं में छापी गई किताबों के साथ प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें भारी भीड़ जुट रही है.न्यास के अध्यक्ष प्रोफेसर बल्देव भाई शर्मा के अनुसार देश और दुनिया इस साल महात्मा गांधी की जयंती के 150 साल के समारोहों का जश्न मना रही है, इसलिए न्यास ने महात्मा गांधी के साथ-साथ भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में उनके सहयोगियों की किताबों पर भी जोर दिया है. यही नहीं बच्चों के उत्साह को ध्यान में रखकर उनके लिए कुल 40 शीर्षकों की किताबें भी प्रदर्शित की गई हैं. इसके अलावा नेशनल बुक ट्रस्ट,  'शारजाह इंटरनेशनल बुक फेयर' में 25 भारतीय प्रकाशकों की भागीदारी सुनिश्चित कराने में भी सहायक रहा है. संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत नवदीप सूरी 31 अक्टूबर को इस मेले के उद्घाटन के दिन 'भारत मंडप' में लगे एनबीटी स्टाल और अन्य प्रकाशकों के स्टाल का दौरा किया था.
याद रहे कि  'शारजाह इंटरनेशनल बुक फेयर' में एनबीटी की यह भागीदारी फरवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान जारी किए गए 'भारत-संयुक्त अरब अमीरात संयुक्त वक्तव्य' के हिस्से का प्रतिफल भी है.  वैसे भी शारजाह इस साल नई दिल्ली में ट्रस्ट द्वारा 5-13 जनवरी 2018 तक आयोजित विश्व पुस्तक मेला में सम्मानित अतिथि भागीदार देश के रूप में शामिल हुआ था. इस प्रदर्शनी के दौरान ही ट्रस्ट के प्रतिनिधिमंडल की नुमाइंदगी कर रहे अंग्रेजी के संपादक और परियोजना प्रभारी कुमार विक्रम और उप निदेशक, प्रदर्शनी इमरान उल-हक ने शारजाह पुस्तक प्राधिकरण के अध्यक्ष अल-अमिरी के साथ विभिन्न मुद्दों पर व्यापक बैठक की. शारजाह ने वादा किया है कि आगामी नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में वह लेखकों, प्रकाशकों, कलाकारों, उच्च स्तरीय अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लाएगा और मेले में एक कस्टम-निर्मित शारजाह मंडप का निर्माण करेगा. जिससे साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का एक माहौल बन सके.

About the Author:

Leave A Comment