व्यंग्य सचेत तो करे, अपमानित नहीं- प्रेम जनमेजय

2018-10-04T14:07:41+00:00

बिलासपुरः बिलासा कला मंच द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व्यंग्य महोत्सव में दिल्ली, मुंबई, आगरा, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों से व्यंग्यकार, कथाकार बिलासपुर पहुंचे. कार्यक्रम का उद्घाटन अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपिति प्रोफेसर डॉ गौरीदत्त शर्मा और प्रख्यात व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमेजय ने किया। विशिष्ठ अतिथि हरीश पाठक, धीरेन्द अस्थाना, गिरीश पंकज, नीलकंठ पारटकर भी कार्यक्रम के शुभारंभ के वक्त मौजूद थे। महोत्सव की प्रस्तावना एवं स्वागत उद्बोधन बिलासा कला मंच के संस्थापक डॉ. सोमनाथ यादव ने किया. डॉ. प्रेम जनमेजय ने व्यंग्य विधा की बारीकियों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि व्यंग्य व्यक्ति को सचेत तो करे उसे अपमानित न कर. वहीं कुलपति शर्मा ने अपने जीवन से जुड़े अनुभवों से व्यंग्य की शैली में अपनी बात रख. इस अवसर पर संजीव कुमार की पुस्तक का विमोचन भी किया गय.

कार्यक्रम के बाद सभी व्यंग्ययात्री शाम 4 बजे रतनपुर दर्शन के लिए रवाना हुए. जहां मन महामाया सिद्धपीठ के दर्शन के बाद आमंत्रित साहित्यकारों का मंदिर परिसर में सम्मान भी किया गया. सन्ध्या 7 बजे काव्यपाठ का आयोजन हुआ। इस मौके पर मलिक राजकुमार, रणविजय राव, प्रियंका सैनी दिल्ली से. डॉ संजीव कुमार, नोएडा, गोपी कृष्ण बुबना मुंबई से,  बी आर साहू, डॉ नायडू, दीपक सरीन मौजूद थे। इसके अलावा सुनील जैन राही, सौम्या दुआ, ज्योति विश्वकर्मा, पूजा अग्रवाल ,वर्षा रावल, अजय पाठकराजेंद्र मौर्य, रमाकांत ताम्रकार, बलदेव त्रिपाठी डॉ जी डी पटेल, डॉ सुधाकर बिबे, द्वारिका प्रसाद अग्रवाल, सनत तिवारी, आनन्द प्रकाश, रामेश्वर गुप्ता, अश्वनी पांडे, महेश श्रीवास, नरेंद्र कौशिक,रतन जैसवानी, श्रीकुमार पांडे, पाटले आदि उपस्थित थे.

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