धागेना- धिनक -धिन, को दाल -भात -चटनी बनाकर सिखाया- आदित्य गुंजन

2018-10-04T18:47:48+00:00

पटना: आदित्य गुंजन ने  बिहार  में पहली बार महादलित महिलाओं का बैंड प्रशिक्षित कर खड़ा करने  का ऐतिहासिक  काम किया है। इन महादलित  महिलाओं को विदेशमंत्री सुषमा स्वराज से लेकर अमिताभ बच्चन के ' कौन बनेगा करोड़पति' तक हर जगह मान मिला है। हाल में इन महिलाओं पर एक वृत्तचित्र 'वुमनिया' नाम से बनी है। इन सबके पीछे हैं रंगकर्म व संगीत से जुड़े रहने वाले आदित्य गुंजन। गुंजन ने  जागरणहिंदी से अपना संघर्ष साझा किया…


मुझे संगीत से बहुत लगाव था, मै बचपन से मंदिरों में कीर्तन में ढोलक बजाने जाय करता था। तब मैं कक्षा 6 या 7 में पढ़ता था।गांधी मैदान में नुक्कड़ नाटक ' प्रेरणा' संस्था के द्वारा किया जा रहा था । नाटक देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ और मैं 'प्रेरणा' संस्था से जुड़कर अभिनय और वादन करने लगा। आगे चलकर कई नाटकों में रंग संगीत दिया ।

पदमश्री  सुधा वर्गीज़ के द्वारा फ़ोन से संपर्क हुआ 2013 में और मुझे उन महिलाओं से मिलाया गया, जो आगे चलकर 'वुमनिया ' के नाम से मशहूर हुईं। इन महिलाओं को ड्रम सिखाने का सिलसिला शुरू हुआ ।इन महिलाओं के साथ मैंने लगभग 18 महीने काम किया।रिदम   का बोल एक ही होता है, साज बदल जाते है तो बजाने का अंदाज बदल जाता हैलेकिन बोल नही बदलता हैं। इस आधार पर मैने इन्हें ड्रम सिखाया।

 ये महिलाएं संगीत के भाषा को नही समझ पाती थी जैसे धा धीना,ना तिना / धागे न तिनक धीन। तब मैंने इन्ही की भाषा मे जैसे भात , दाल, चटनी पापड़, तिलौरी, चलौरी एवं हाली – हाली जैसे शब्दो का बोल बनाकर प्रयोग किया। तब  इन्हें  रिदम को समझकर बजाने में सहायता मिली पहले तो ये महिलाये सीखने के लिए तैयार नही थी । मुझे देखते ही ये सब भाग जाती थी , और बुलाने पर आती थी । इनके पति एवं घर के अन्य पुरुष और समाज के कई लोग महिलाओ के ड्रम सीखने के खिलाफ थे । इनका कहना था कि खेत मे काम करेगी तो पैसा आएगाये ड्रम बजाकर क्या कर लेंगीड्रम तो पुरुष बजाते है, पुरुषों को सिखाइए।  औरतों को रोड पर ड्रम बजाते कभी देखें है ? लोग क्या कहेंगे रात-बिरात में जहाँ-तहाँ जाएंगी हमारा इज्जत उछालेंगी समाज से हमें बाहर कर दिया जाएगा। कौन शादी करेगा करेगा बेटा- बेटियों से , ये लोग नही सीखेंगी, सिखाना है तो हमे सिखाइए। ऐसे  आक्रोशपूर्ण वक्तव्यों का मुझे सामना करना पड़ा । गांव के मनचलों के अपशब्दों का मुझे सामना करना पड़ा।

अबतक महिला बैंड 60 से 70 प्रस्तुतियां जो कि बिहार में और बिहार से बाहर जैसे केरल , दिल्ली , मुम्बई एवं कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर प्रस्तुतियां हुई है। बहुत ही अच्छा  रिस्पांस रहा , लोगो के लिए ये महिलाएं प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं । 

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