साहित्यायन का स्थापना समारोह: व्याख्यान, सम्मान और सांस्कृतिक सांझ

2018-09-08T20:04:58+00:00

नई दिल्लीः  तीन साल पहले सामाजिक सरोकारों से जुड़े साहित्यकारों द्वारा गठित साहित्यायन परिवार ने बड़े धूमधाम से ट्रस्ट का तीसरा स्थापना दिवस मनाया. इस अवसर पर कई दशकों से निरंतर साहित्य और समाज सेवा करनेवाले दो विभूतियों- भगवत धाम में निवास करते हुए भी निरंतर समाजोत्थान हेतु प्रयासरत 97 वर्षीय युवा योगबीर हांडा एवं पांच दशकों से भी अधिक समय से वंकित समाज को अधिकार दिलाने एवं उनकी जरूरतों को पूरा करने हेतु प्रयासरत वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल को ट्रस्ट का सर्वोच्च सम्मान 'साहित्यायन समष्टि साधक सम्मान' अर्पित किया गया. हालांकि चित्रा मुद्गल के वर्धा जाने के चलते संस्था ने उनके घर पर जाकर शॉल एवं प्रशस्ति पत्र अर्पित किए, और तय हुआ कि सम्मान फलक उनके वापस आने पर अर्पित किया जाएगा. कार्यक्रम की शुरुआत ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रजेन्द्र त्रिपाठी के स्वागत भाषण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई. दीप प्रज्ज्वलन के समय 4 वर्षीया आद्रिका द्वारा गायत्री मंत्र-पाठ हुआ. इसके पश्चात धीरा वर्मा द्वारा सरस्वती वंदना की सुंदर प्रस्तुति हुई नन्ही आद्रिका ने 'मैया यशोदा गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया. सांस्कृतिक कार्यक्रम में नन्हें बच्चों की भागीदारी महत्त्वपूर्ण रही. 4 वर्षीय आश्वी ने जहां अभिनय गीत सुनाया, वहीं नन्हें आयुष्मान ने श्लोक सुनाया.

इस अवसर पर आयोजित व्याख्यान माला 'मैं, मेरी ज़मीन और मेरे लोग' विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने प्रभावपूर्ण वक्तव्य दिया. इस मौके पर साहित्यायन परिवार की शुभचिंतक और ट्रस्ट की सलाहकार डॉ. करुणा पांडे की पुस्तक 'मुन्नू की म्याऊँ' का लोकार्पण भी हुआ. यह बाल कृति संवेदना से पूर्ण रेखाचित्र है, जो लेखिका के संवेदनशील हृदय का परिचय देती है. राजस्थान के दौसा ज़िले के अंतर्गत प्रेमपुरा गाँव के डॉ. सरदार मीणा ने अपनी कविता के माध्यम से एक ओर आदिवासी परिवार में संबंधों के प्रति जीवंत संवेदना प्रस्तुत की, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आदिवासी जीवन के कष्टों और संघर्षों का भावपूर्ण चित्र खींचा. भगवत धाम वृद्धाश्रम में निवास करतीं विमला नेगी ने अपनी कविताओं में अनेक रंग प्रस्तुत किए. रजनी वैद्य ने भी अपनी कविता का पाठ किया. अमन संदीप वर्मा द्वारा क्लासिकल नृत्य की शानदार प्रस्तुति के साथ ही साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ. सभी सहभागियों को सहभागिता सम्मानके रूप में स्मृति चिह्न एवं प्रशस्तिपत्र भेंट किए गए. इस अवसर पर डॉ. अशोक मैत्रेय, अरुण पासवान, जयप्रकाश मिश्र, डॉ. सुदर्शन रत्नाकर, डॉ. विमलेशकांति वर्मा, डॉ. गंगा सहाय मीणा एवं ट्रस्ट के सलाहकार डॉ. देवेन्द्र शुक्ल, अनिल कुमार पांडेय सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन न्यासी द्वय ब्रजेन्द्र त्रिपाठी एवं डॉ. आरती स्मित ने मिलकर किया. कार्यक्रम को गति देने में क्षेत्रीय सचिव प्रणीता, कार्यक्रम अधिशासी डॉ. मनाली, अर्शदीप सरोहा एवं श्रेया श्रुति की महती भूमिका रही

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