दैनिक जागरण वार्तालाप 2018-02-22T10:30:11+00:00

दैनिक जागरण वार्तालाप

जागरण वार्तालाप लेखकों का मंच है. इस मासिक आयोजन में लेखकों के साथ उसकी नवीनतम कृति पर बातचीत की जाती है. श्रोताओं के तौर पर शहर के प्रबुद्ध लोगों को आमंत्रित किया जाता है. कोशिश ये की जाती है कि साहित्य से जुड़े लोगों के अलावा अन्य क्षेत्र के लोगों को भी आमंत्रित किया जाए ताकि पढ़ने की आदत का विकास हो सके. पहले लेखक के साथ उनकी पुस्तक और फिर अन्य मसलों पर सवाल जवाब होते हैं और फिर मौजूद श्रोताओं को भी प्रश्न-उत्तर का मौका मिलता है. जागरण वार्तालाप का उद्देश्य पुस्तक और पाठक संस्कृति का विकास करना है. इस बातचीत के मुख्य अंश दैनिक जागरण में प्रकाशित किए जाते हैं.

आनंद नीलकंठन

दैनिक जागरण वार्तालाप श्रृंखला का तीसरा आयोजन लखनऊ के प्रतिष्ठित युनिवर्सल बुकसेलर, गोमतीनगर में किया गया। मिथक लेखन की जटिलताओं पर मशहूर लेखक आनंद नीलकंठन से बातचीत की टीवी एंकर अनुराग पुनेठा ने। लखनऊ के प्रबुद्ध श्रोताओं के बीच आनंद नीलकंठन ने अपने लेखन से जुड़ी कई बातें साझा की। आनंद नीलकंठन केरल के रहनेवाले हैं और लखनऊ में उन्होंने पूरी बातचीत हिंदी में की। दैनिक जागरण वार्तालाप एक ऐसा मंच है जहां किसी भी भाषा के लेखक से हिंदी में बातचीत की जाती है। आनंद नीलकंठन ने भारतीय पौराणिक चरित्रों पर अपनी एक अलग ही दृष्टि पेश की और कहा कि मिथकीय और पौराणिक चरित्रों पर लिखना बहुत मुश्किल कार्य है। दो चार किताबें पढ़कर कोई भी मिथकीय चरित्रों पर नहीं लिख सकता है। आनंद के मुताबिक जगह के हिसाब के मिथकीय या पौराणिक चरित्रों का चित्रण अलग अलग होता है। इस संदर्भ में उन्होंने थाईलैंड के रामायण और भारतीय रामायण की कहानी पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मैत्रेयी पुष्पा

दैनिक जागरण वार्तालाप का दूसरा आयोजन दिल्ली के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में हुआ था। वार्तालाप में शामिल हुई थीं हिंदी की सुप्रसिद्ध लेखिका मैत्रेयी पुष्पा, कहानीकार विवेक मिश्र, सामयिक प्रकाशन के महेश भारद्वाज और हिंद युग्म के शैलेश भारतवासी। वार्तालाप की इस कड़ी में ¨हिंदी में बेस्टसेलर की अवधारणा पर जमकर चर्चा हुई । वार्तालाप में मैत्रेयी पुष्पा से साफ किया कि उनको पाठकों की कमी नहीं है, रॉयल्टी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती। कहानी कार विवेक मिश्र का मानना था कि हिंदी का लेखक रॉकेट की तरह लांच नहीं होता, बल्कि उसकी जमीन धीरे-धीरे तैयार होती है। सामयिक प्रकाशन के निदेशक महेश भारद्वाज ने कहा कि पश्चिमी देशों की तर्ज पर ¨हिंदी में बेस्टसेलर खोजना स्वागत योग्य कदम है। हिंद युग्म प्रकाशन के निदेशक शैलेश भारतवासी ने जोर देकर कहा कि हिंदी में प्रकाशकों के पास न तो धनबल और न ही बेहतर वितरण प्रणाली। बेस्टसेलर पर हुई इस गर्गामर्म बहस का संचालन टीवी पत्रकार राखी बक्षी ने किया।

जयराम रमेश

जागरण वार्तालाप  की शुरुआत नोएडा से हुई, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने अपनी नई किताब किताब इंदिरा गांधी, अ लाइफ इन नेचर पर पर करीब दो घंटे तक बातचीत की और सभी सवालों का खुलकर जवाब दिया। । इंदिरा गांधी की जन्म शताब्दी वर्ष में प्रकाशित जयराम रमेश की इस पुस्तक से देश की पूर्व प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व का एक नया पहलू पाठकों के सामने आया है। जयराम रमेश ने किताब लिखने के अपने अनुभवों के साथ साथ पर्यावरण और अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। मथिरा में रिफाइनरी लगाने के इंदिरा गांधी के फैसले पर उन्होंने सवाल भी खड़ा किया। देश में इमरजेंसी लगाने के सवाल पर साफ तौर पर उनका मानना था कि संजय गांधी की मां ने इमरजेंसी लगाई और जवाहरलाल की बेटी ने देश से इमरजेंसी हटाई। रेडिसन ब्लू होटल में आयोजित इस पूरी बातचीत में नोएडा के प्रबुद्ध लोगों ने भी जयराम रमेश से सवाल जवाब किए।

प्रो सुधीश पचौरी

साहित्य को खांचे में बांटना भ्रामक- प्रो सुधीश पचौरी

दैनिक जागरण वार्तालाप श्रृंखला का चौथा आयोजन बिहार की राजधानी पटना के भव्य सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र के ज्ञान भवन में किया गया था। पटना में आयोजित जागरण वार्तालाप में अतिथि लेखक थे दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और हिंदी के सुप्रसिद्ध आलोचक प्रोफेसर सुधीश पचौरी। उनसे बातचीत की संस्कृतिकर्मी अनीश अंकुर ने। लोकप्रिय बनाम गंभीर साहित्य पर हुई इस चर्चा में सुधीश पचौरी ने साहित्य को खांचे में बांटने की प्रवृत्ति को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि दो चार सौ लोगों के बीच जो साहित्य पढ़ा लिखा जाता है उससे बेहतर है एक बड़े पाठक वर्ग के बीच पढ़ा जानेवाला साहित्य। उन्होंने विश्व के अनेक लेखकों का उदाहरण देते हुए अपनी अवधारणा को पुष्ट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहित्य को पाठकों का कंठहार बनाना होगा और इसकी जिम्मेदारी लेखकों पर है। बातों बातों में प्रो सुधीश पचौरी ने फिल्म पद्वावती पर चल रहे विवाद पर भी जमकर चुटकी ली।